श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश): भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को रविवार को उस समय झटका लगा जब उसका भरोसेमंद पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) पृथ्वी अवलोकन उपग्रह को निर्धारित कक्षा में स्थापित करने में असफल रहा। लॉन्च के कुछ ही मिनटों बाद रॉकेट में तकनीकी खराबी आ गई।

ISRO के श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 5:59 बजे PSLV-C61 रॉकेट का सफल प्रक्षेपण हुआ। यह मिशन इसरो का 101वां प्रक्षेपण था। हालांकि उड़ान के 12वें मिनट में रॉकेट के तीसरे चरण के दौरान तकनीकी गड़बड़ी सामने आई, जिससे मिशन पूरा नहीं हो सका।

ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन ने बताया कि PSLV चार चरणों वाला रॉकेट है। पहले और दूसरे चरण का प्रदर्शन सामान्य रहा, लेकिन तीसरे चरण के दौरान मोटर केस के चैंबर प्रेशर में गिरावट दर्ज की गई, जिसके कारण मिशन विफल हो गया।

उन्होंने कहा कि पूरे मिशन के प्रदर्शन का विश्लेषण किया जा रहा है और जल्द ही इसके कारणों की जानकारी दी जाएगी।

यह PSLV की तीसरी विफलता है। इससे पहले 1993 में इसके पहले प्रक्षेपण और 2017 में एक नेविगेशन सैटेलाइट मिशन में असफलता हुई थी। अब तक PSLV के कुल 63 प्रक्षेपण हो चुके हैं। इसी रॉकेट ने चंद्रयान-1 और मंगल ऑर्बिटर मिशन जैसे सफल अभियान पूरे किए हैं।

इससे पहले जनवरी में GSLV रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित नेविगेशन सैटेलाइट NVS-02 भी तय कक्षा में नहीं पहुंच पाया था और फिलहाल वह दीर्घवृत्ताकार कक्षा में कार्य कर रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, तीसरे चरण में खराबी आने के बाद रॉकेट लगभग 450 किलोमीटर की ऊंचाई से समुद्र में गिर गया होगा।

EOS-09 उपग्रह, 2022 में लॉन्च किए गए EOS-04 जैसा ही है। इसका उद्देश्य कृषि, वन प्रबंधन, आपदा प्रबंधन, शहरी नियोजन और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों के लिए हर मौसम में, दिन-रात पृथ्वी की तस्वीरें उपलब्ध कराना था। इसमें सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) लगाया गया है, जो सभी मौसमों में काम करने में सक्षम है।

यह मिशन अंतरिक्ष मलबा-मुक्त रखने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। वैज्ञानिकों ने उपग्रह के जीवनकाल के बाद उसे सुरक्षित रूप से डी-ऑर्बिट करने के लिए ईंधन भी सुरक्षित रखा था।

पूर्व ISRO अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने कहा कि तीसरे चरण के ठोस मोटर के विकास के दौरान कई चुनौतियाँ और विफलताएँ सामने आई थीं। उन्होंने विश्वास जताया कि वैज्ञानिक जल्द ही इस समस्या की जड़ तक पहुँचेंगे।