विद्यापतिनगर प्रखंड के बाजिदपुर स्थित सेंट मैरीस इंग्लिश स्कूल परिसर में ज्ञान, विद्या और बुद्धि की देवी माँ सरस्वती की पूजा पूरे विधि-विधान एवं भक्तिभाव के साथ संपन्न हुई। विद्यालय परिसर पूजा के अवसर पर आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर दिखाई दिया, जहाँ विद्यार्थियों, शिक्षकों और प्रबंधन की सक्रिय भागीदारी रही।

इस पावन अवसर पर विद्यालय के डायरेक्टर थॉमस सर तथा प्राचार्य शिज्जी थॉमस की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। पूजा-अर्चना का दायित्व विद्यालय के विज्ञान शिक्षक मुकुंद पाठक ने पूजा आचार्य के रूप में निभाया और पूरे विधि-विधान के साथ माँ सरस्वती की आराधना कराई।

पूरे कार्यक्रम के सफल आयोजन एवं समन्वय में विद्यालय के अनेक शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। राजीव सर, स्वास्तिक सर, आदर्श सर, नंदन सर, अनीस सर, रौशन सर, ओम प्रकाश सर, बिनॉय सर, जिन्नो सर के साथ-साथ मंजिता मैम, स्वाति मैम एवं रश्मि मैम निरंतर व्यवस्था बनाए रखने, विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करने और कार्यक्रम को सुचारु रूप से संपन्न कराने में सक्रिय रूप से उपस्थित रहे। शिक्षकों की एकजुटता और अनुशासन ने विद्यालय की सुदृढ़ शैक्षणिक संस्कृति को स्पष्ट रूप से दर्शाया।

सरस्वती पूजा में विद्यालय के छात्र-छात्राओं की भागीदारी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। पूजा में बैठने वाले विद्यार्थियों में दिव्या, सानिया, आयुषी, आराधना, आस्था, नैना, रौशन, राज, राहुल, तुषार, अमन सहित अन्य छात्र-छात्राएँ शामिल रहे, जिन्होंने पूरे श्रद्धा भाव से माँ सरस्वती की आराधना की। विद्यार्थियों ने ज्ञान, एकाग्रता और सफलता की कामना करते हुए माता के चरणों में अपनी भावनाएँ समर्पित कीं।

St. Mary's English School Vidyapatinagar, Samastipur, Bihar

पूजा के उपरांत प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों ने सहभागिता निभाई। विद्यालय प्रबंधन की ओर से यह संदेश दिया गया कि शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक एवं नैतिक मूल्यों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। सरस्वती पूजा का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि विद्यार्थियों के मन में शिक्षा के प्रति सम्मान, अनुशासन और सकारात्मक सोच को भी प्रोत्साहित करने वाला सिद्ध हुआ।

कुल मिलाकर, सेंट मैरीज़ इंग्लिश स्कूल में आयोजित सरस्वती पूजा का यह भव्य एवं सुव्यवस्थित कार्यक्रम विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक सहभागिता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया।

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