बराबरी का हिस्सा - एक शिक्षाप्रद कहानी

एक गांव में दो भाई रहते थे – शामू और रामू। शामू बहुत चालाक था, जबकि रामू सीधा-साधा और भोला। उनके पास केवल एक कंबल और एक भैंस थी, जिन्हें वे मिल-जुलकर इस्तेमाल करते थे। दोनों बेहद गरीब थे।

एक दिन उनके पिता का देहांत हो गया। तब बड़े भाई शामू ने कहा,  

“रामू, आओ बंटवारा करें।”  

रामू बोला, “पर भाई! हमारे पास क्या है जो बांटें?”  

शामू ने कहा, “भैंस है, आओ उसे बांटें।”  

भोले रामू ने हामी भर दी।

शामू ने चालाकी से कहा, “भैंस का अगला हिस्सा तेरा और पिछला मेरा। इसी तरह, दिन में कंबल तेरा और रात में मेरा।”  

रामू ने कुछ समझे बिना मान लिया।

अब हर सुबह रामू को भैंस के आगे का हिस्सा संभालना होता – चारा डालना, पानी देना। शाम को शामू आकर दूध निकालकर ले जाता, क्योंकि दूध तो पिछली तरफ से निकलता।  

रामू दिन भर भैंस चराता और गर्मी में कंधों पर कंबल लपेटे चलता। लोग उसे देख कर हंसते। वह दुखी था, मगर कभी शिकायत नहीं की।

एक दिन उसकी मुलाकात एक साधु से हुई। रामू ने अपना दुख बताया। साधु ने एक उपाय सुझाया –  

“जब शामू दूध निकाले, तो भैंस की गर्दन पर डंडा मारना। और रात में कंबल मांगे, तो उसे अच्छी तरह गीला करके देना।”

रामू ने वैसा ही किया। जैसे ही शामू ने दूध निकालना शुरू किया, रामू ने गर्दन पर डंडा मारा और भैंस उछलने लगी।  

शामू चिल्लाया, “रामू, ये क्या कर रहा है?”  

रामू बोला, “भैंस का अगला हिस्सा मेरा है, जो चाहूं करूंगा। तुम्हें इससे क्या?”  

शामू बोला, “लेकिन मैं दूध कैसे निकालूं?”  

रामू हँसा, “मैंने दूध निकालने से नहीं रोका...तरीका तुम ढूंढो।”

अब शामू को अपनी चालाकी की सच्चाई समझ आई। उसने कहा,  

“भाई, आज से हम दूध आधा-आधा बांटेंगे। कल से मैं भी भैंस चराने चलूंगा।”

रात को उसने कंबल मांगा, तो रामू ने उसे पानी में भीगा हुआ कंबल पकड़ा दिया।  

शामू चौंका, “ये तो भीगा हुआ है!”  

रामू बोला, “दिन में कंबल मेरा है, चाहे जैसे इस्तेमाल करूं।”

शामू को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने रामू से माफी मांगी और दोनों भाई मिल-जुलकर रहने लगे।

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कहानी से सीख:

  •  झगड़ों से बचिए, समझदारी से काम लीजिए।  
  • भाईचारा, विश्वास और ईमानदारी ही सच्ची सुख-शांति की कुंजी हैं।  
  • चालाकी से मिले हिस्से की खुशी ज्यादा दिन नहीं टिकती।